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اردو हिन्दीभाषियों के लिए

  1. शब्द-कार्ड
  2. उर्दू क्या है?
  3. मुख्य शब्दावली
  4. व्याकरण — लगभग वही
  5. लिपि और उच्चारण — नस्तालीक़
  6. हिन्दीभाषियों की आम गलतियाँ
  7. सीखने के संसाधन
  8. संदर्भ
  9. संबंधित गाइड

1. शब्द-कार्ड

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2. उर्दू क्या है?

बोलचाल के स्तर पर उर्दू और हिन्दी असल में एक ही भाषा हैं — «हिन्दुस्तानी»। व्याकरण और रोज़मर्रा की शब्दावली साझा है; फ़र्क़ मुख्यतः लिपि (नस्तालीक़ बनाम देवनागरी) और औपचारिक/साहित्यिक शब्दावली का है (उर्दू फ़ारसी-अरबी से, हिन्दी संस्कृत से)।

इसलिए एक हिन्दीभाषी के लिए उर्दू सीखना ज़्यादातर नस्तालीक़ लिपि और कुछ फ़ारसी-अरबी शब्दों को सीखना है। बातचीत तो आप पहले से समझते ही हैं।

क्यों सीखें?

3. मुख्य शब्दावली (1–63)

उपयोगी उर्दू शब्द (नस्तालीक़ लिपि + रोमन) और हिन्दी अर्थ। यही सेट ऊपर के फ़्लैशकार्ड में है। खोज-बॉक्स से छाँटें।

#اردوहिन्दी

4. व्याकरण — लगभग वही

उर्दू और हिन्दी का व्याकरण लगभग समान है: कर्ता–कर्म–क्रिया (SOV), परसर्ग (postpositions), लिंग और «ने» वाला भूतकाल — सब वैसा ही। असली काम लिपि और शब्दावली का है।

रजिस्टर (शब्दावली का स्तर)

रोज़मर्रा के शब्द साझा हैं। औपचारिक उर्दू फ़ारसी-अरबी शब्द पसंद करती है, जबकि औपचारिक हिन्दी संस्कृत-मूल के। जैसे «धन्यवाद» (हिन्दी) बनाम «شکریہ शुक्रिया» (उर्दू)।

5. लिपि और उच्चारण — नस्तालीक़

उर्दू दाएँ से बाएँ नस्तालीक़ में लिखी जाती है; छोटी स्वर-ध्वनियाँ अक्सर नहीं लिखी जातीं। उर्दू कुछ फ़ारसी-अरबी व्यंजन अलग रखती है जिन्हें हिन्दी अक्सर मिला देती है।

ध्वनिटिप्पणी
ق (q)गले के पिछले हिस्से से «क़»
خ (ख़) / غ (ग़)फ़ारसी-अरबी गले की ध्वनियाँ
ف (फ़) / ز (ज़)उर्दू इन्हें अलग रखती है
लिपि की दिशादाएँ से बाएँ; अक्षर जुड़कर बदलते हैं

6. हिन्दीभाषियों की आम गलतियाँ

7. सीखने के संसाधन

8. संदर्भ

एक ज़बान, दो लिपियाँ

उर्दू और हिन्दी का बोलचाल में एक होना और लिपि व रजिस्टर से अलग हो जाना दिखाता है कि «भाषा» की सीमाएँ अक्सर सांस्कृतिक-राजनीतिक भी होती हैं।

अदब और तहज़ीब

उर्दू तहज़ीब «अदब» (शिष्टता) को महत्व देती है — विनम्र संबोधन और शेर-ओ-शायरी रोज़मर्रा की बातचीत का हिस्सा हैं।